भाई बहन की जान और सम्मान (संस्मरण) – प्रवीणा सिंह राणा “प्रदन्या”

बचपन की गलियों में सबसे प्यारा रिश्ता यदि कोई होता है, तो वह भाई-बहन का रिश्ता है। इसमें कभी तकरार होती है, कभी मनुहार, तो कभी बिना कहे एक-दूसरे के लिए समर्पण। मेरा यह संस्मरण भी मेरे और मेरे बड़े भाई से जुड़ी एक ऐसी ही घटना है, जिसने मुझे यह एहसास कराया कि भाई केवल घर का सदस्य नहीं, बल्कि बहन की जान और सम्मान होता है।
मैं तब आठवीं कक्षा में पढ़ती थी। गांव के स्कूल तक जाने के लिए कच्चे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता था। एक दिन स्कूल से लौटते समय कुछ लड़कों ने मेरा मज़ाक उड़ाना शुरू कर दिया। मैं बहुत घबरा गई थी, लेकिन डर के कारण किसी से कुछ कह नहीं पाई। घर आकर भी मन उदास रहा। मेरे भाई ने मेरी बुझी हुई आंखें देखकर पूछ लिया, “क्या बात है?” पहले तो मैं चुप रही, पर उनके बार-बार पूछने पर सब बता दिया।
मेरी बात सुनते ही उनके चेहरे पर गुस्सा तो आया, लेकिन उन्होंने बहुत संयम से कहा, “तू चिंता मत कर, जब तक तेरा भाई जिंदा है, कोई तेरी ओर आंख उठाकर भी नहीं देख सकता।” अगले दिन वह मुझे स्कूल छोड़ने गए। उन्होंने उन लड़कों को समझाया भी और चेतावनी भी दी कि किसी बेटी या बहन का सम्मान करना सीखो। उस दिन के बाद कभी किसी ने मुझे परेशान नहीं किया।
उस घटना के बाद मेरे मन में अपने भाई के प्रति आदर और बढ़ गया। मुझे लगा कि भाई केवल रक्षा करने वाला नहीं होता, बल्कि बहन के आत्मविश्वास की ताकत भी होता है। भाई का स्नेह बहन के लिए छांव जैसा होता है, जिसमें वह स्वयं को सुरक्षित महसूस करती है।
आज समय बदल गया है, लोग रिश्तों में औपचारिकता ढूंढने लगे हैं, लेकिन भाई-बहन का रिश्ता आज भी निस्वार्थ प्रेम की सबसे सुंदर मिसाल है। भाई बहन की केवल जान ही नहीं, उसका सम्मान और अभिमान भी होता है।
प्रवीणा सिंह राणा “प्रदन्या”




