मधुआशा’ लघुकथा संग्रह का लोकार्पण, हिंदी-मराठी साहित्यिक संवाद को मिली नई दिशा

इंदौर। हिंदी के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं में भी लघुकथा विधा पर लगातार गंभीर कार्य हो रहा है। साहित्यकारों ने इसे लघुकथा के बढ़ते प्रभाव और लोकप्रियता का सकारात्मक संकेत बताया। यह विचार मराठी भाषा में लिखी तथा हिंदी से मराठी में अनूदित लघुकथाओं के साझा संग्रह ‘मधुआशा’ के लोकार्पण समारोह में व्यक्त किए गए।
विचार प्रवाह साहित्य मंच के बैनर तले इंदौर प्रेस क्लब सभागृह में आयोजित समारोह की अध्यक्षता मराठी अकादमी के पूर्व निदेशक श्री अश्विन खरे ने की। कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य डॉ. श्रीकांत तारे, वरिष्ठ लेखिका श्रीमती वैजयंती दाते, श्रीमती सुषमा दुबे एवं श्री मधुकर डी. बुधे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संग्रह की संपादक निशा बुधे झा ने बताया कि ‘मधुआशा’ में तीन राज्यों के 14 लघुकथाकारों की 42 चयनित लघुकथाओं को शामिल किया गया है। यह संग्रह हिंदी और मराठी साहित्य के बीच रचनात्मक संवाद को मजबूत करने का प्रयास है।
समारोह में लघुकथाकार अर्चना पंडित, कविता चौहान तथा छायाकार नरेंद्र होलकर को सम्मानित किया गया। अतिथियों का स्वागत अमन झा, भुवनेश दशोत्तर, संजय त्रिपाठी एवं डॉ. पूनम ज्वेल ने किया। सरस्वती वंदना डॉ. आरती दुबे ने प्रस्तुत की, जबकि स्वागत उद्बोधन माधुरी व्यास नवपमा ने दिया।कार्यक्रम में आशा मुंशी, भावना बर्वे, डॉ. ज्योति सिंह, निरुपमा त्रिवेदी, प्रणव श्रोत्रिय, प्रो. अखिलेश राव एवं शीला चंदन ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। कार्यक्रम का संचालन मुकेश तिवारी ने किया तथा आभार देवेंद्रसिंह सिसौदिया ने व्यक्त किया।




