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जग की झूठी माया — गजानन्द टेलर की कलम से

 

हे परमपिता परमेश्वर, विष्णु चक्र सुदर्शन धारी,
पाप, कपट, पाखंड फैल रहा, आज जगत में भारी।

चोरी, डाका, गुंडागर्दी की फैल रही महामारी,
तेरे होते आज तड़प रहे दुनिया में नर-नारी।

रिश्वतखोर और भ्रष्टाचारी बन बैठे हैं पुजारी,
गौ माता आज भटक रही जग में मारी-मारी।

कुत्ते आज कार में घूम रहे बन करके अधिकारी,
मटर पनीर के आगे फेल हो रही आज हरी तरकारी।

पिज़्ज़ा, बर्गर, चाऊमीन और पाव की छवि न्यारी,
दही, छाछ, घी, मलाई छोड़कर चाय लग रही प्यारी।

दाल-रोटी की कीमत घट गई, फास्ट फूड की तैयारी,
घर में नन्हे-मुन्ने बच्चों की छोटी सी है क्यारी।

मोबाइल का रोग फैल रहा, कैसे खिले फुलवारी,
इस युग में श्रीराम भक्त हनुमान ही हैं ब्रह्मचारी।

घर-घर मंदिर बन गए, पूजे दुनिया सारी,
बापू आज दुश्मन लग रहे, ज़हर लगे महतारी।

पाल-पोसकर बड़ा किया जिन्हें, बन गए अत्याचारी,
धर्म-कर्म अब लुप्त हो रहा, देख रहे बनवारी।

हे प्रभु! अब कृपा दृष्टि कर दो, सुन लो विनय हमारी,
गजानंद भगवान भरोसे, झूठी है दुनियादारी।

गजानंद टेलर

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