सावन में कांवड़ियों की सेवा कर पप्पू चौधरी ने पेश की मानवता की मिसाल

जयपुर।चौमूं सावन का पवित्र महीना आते ही पूरा वातावरण भगवान शिव की भक्ति से सराबोर हो जाता है। शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और कांवड़िए हर-हर महादेव, बोल बम के जयघोष के साथ शिवधामों की ओर बढ़ रहे हैं।
चौमूं क्षेत्र स्थित मालेश्वर महादेव मंदिर सहित आसपास के शिव मंदिरों में इन दिनों भक्तों का तांता लगा हुआ है। कांवड़ियों की शिवभक्ति और उनके उत्साह का दृश्य देखते ही बनता है।इसी धार्मिक माहौल के बीच चौधरी होटल एवं रेस्टोरेंट के मालिक पप्पू चौधरी और सरोज चौधरी द्वारा कांवड़ियों एवं शिवभक्तों की सेवा के लिए निःशुल्क चाय-पानी की व्यवस्था की जा रही है। पप्पू चौधरी परिवार सहित सेवा कार्य में जुटकर कांवड़ियों को चाय-पानी उपलब्ध कराते हैं और रास्ते से गुजरने वाले श्रद्धालुओं का आत्मीयता से स्वागत करते हैं। पप्पू चौधरी का यह सेवा भाव क्षेत्र में श्रद्धालुओं के बीच विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है। उनका मानना है कि धार्मिक आस्था केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जरूरतमंद और थके हुए भक्तों की सेवा करना भी सच्ची भक्ति का ही एक रूप है। उन्होंने कहा कि पैसा तो दुनिया में हर कोई कमाता है, लेकिन किसी भक्त की सेवा करने और उसके चेहरे पर संतोष देखने से जो आनंद मिलता है, वह कहीं और नहीं मिलता। मानव सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं है।
उन्होंने बताया कि सावन में बड़ी संख्या में कांवड़िए मालेश्वर महादेव सहित विभिन्न शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। लंबी यात्रा के दौरान उन्हें चाय-पानी जैसी छोटी-छोटी सुविधाओं की आवश्यकता होती है। ऐसे में यदि उनकी थोड़ी भी सेवा हो जाए और उन्हें राहत मिले, तो यही उनके लिए सबसे बड़ा संतोष है। पप्पू चौधरी और सरोज चौधरी की इस पहल से न केवल कांवड़ियों को राहत मिल रही है, बल्कि समाज में सेवा, सद्भाव और मानवता का संदेश भी पहुंच रहा है। स्थानीय लोगों ने भी उनके सेवा कार्य की सराहना करते हुए कहा कि सावन जैसे पवित्र अवसर पर श्रद्धालुओं की निःस्वार्थ सेवा करना निश्चित रूप से अनुकरणीय पहल है। कांवड़ियों की सेवा में जुटे पप्पू चौधरी का कहना है कि भगवान शिव की भक्ति का वास्तविक आनंद तभी है, जब उनकी राह पर चलने वाले भक्तों की सेवा और सहायता की जाए। उनका यह सेवाभाव सावन की आस्था को मानवता से जोड़ने वाली एक सुंदर मिसाल बन रहा है।




