जयपुर आइकॉन्स के ‘उत्सव की लहर, आस्था के स्वर’ में सजी भक्ति, संस्कृति और रचनात्मकता की शाम।

सुनितात्रिपाठी’अजय। इंडिया जागरण टुडे न्यूज संवाद
जयपुर। जयपुर आइकॉन्स की ओर से शुक्रवार, 11 सितंबर को जयपुर क्लब लिमिटेड स्थित बैम्बू नूक में “उत्सव की लहर, आस्था के स्वर” विषय पर भव्य सांस्कृतिक आयोजन किया गया। “भक्ति और संस्कृति के भावों से सजी एक साँझ” की संकल्पना के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में संगीत, साहित्य, कला, भक्ति और परंपरा के विविध रंग देखने को मिले।
कार्यक्रम की शुरुआत जयपुर आइकॉन्स की संस्थापक टीम—कल्पना पुरोहित, रिया मनोज, हेमलता शाह और दीपक सिहाग—द्वारा सदस्यों एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। इस अवसर पर टीम ने जयपुर आइकॉन्स की अब तक की यात्रा, उसके उद्देश्यों और भविष्य की परिकल्पना को भी साझा किया।
जयपुर आइकॉन्स का उद्देश्य जयपुर को विशेष बनाने वाले लोगों, उनकी प्रतिभाओं, कहानियों, विचारों और रचनात्मकता को एक साझा मंच प्रदान करना है। इसी उद्देश्य के साथ संस्था द्वारा हर माह ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें कला, साहित्य, संस्कृति और मानवीय रिश्तों को केंद्र में रखा जाता है।
कार्यक्रम में आलोक कुमार, अशोक शाह, नरेंद्र जैन, शर्मिला जैन, भूमिका जैन, प्रदीप सेठी, शिखा सेठी, शकुंतला धूत, आरती दुबे, रानू श्रीवास्तव, रेशमा खान, सुनीता त्रिपाठी, सोनल शर्मा, संदीप शर्मा, स्नेहा स्नेही, दीपक खियानी, प्रतीक भार्गव, प्रेम प्रकाश, तनुषा नागरथ, प्रीति बापना, पूजा अग्रवाल, मीता माथुर, प्रतिमा नैथानी, सरिता काबरा, रुतु रागिनी, राकेश राठी, जयश्री सरावगी, प्रीति सिहाग और मितुल पुरोहित की सक्रिय उपस्थिति एवं प्रस्तुतियों ने आयोजन को विशेष बना दिया।
इस अवसर पर शांता कोठारी, संस्थापक—Custom Nest, तथा सुनीता वर्मा, संस्थापक—Sonu Fashions ने अपने रचनात्मक एवं आकर्षक डिस्प्ले के माध्यम से आयोजन में उद्यमिता, फैशन और सृजनात्मकता के रंग भी जोड़े।
कार्यक्रम के दौरान भक्ति और परंपरा के साथ रचनात्मक अभिव्यक्ति का सुंदर संगम देखने को मिला। सदस्यों ने अपनी कविताओं, गीतों और विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्सव के विविध भावों को स्वर दिया। वहीं ओपन माइक और जामिंग ने प्रतिभागियों को सहजता से जुड़ने, अपनी प्रतिभा साझा करने और सामूहिक रूप से आनंद लेने का अवसर प्रदान किया।
“उत्सव की लहर, आस्था के स्वर” केवल एक सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अपनी जड़ों से जुड़ने, रचनात्मकता को साझा करने और नए रिश्तों को संजोने की एक खूबसूरत पहल बनकर सामने आया। आयोजन में आस्था से परंपरा जुड़ी, शब्दों से भाव मिले और संगीत के सुरों में सामूहिक खुशियाँ घुल गईं।




