किसान की स्लेट :-बिल्डिंगों में बदलती जमीनों पर मनन जरूरी है – पुष्पा भाटी
देश में किसान खेतिहर भूमि को बेचकर भावी भविष्य में क्यों मोहताज हो रहे हैं? कृषि भूमि से उत्पन्न फसल देश के सुदृढ़ विकास का हिस्सा है। खेतिहर जमीन बदलती बिल्डिंगों के कारण मेरे देश की मिट्टी, जो सोना उगले, उगले हीरे-मोती, कही जाने वाली आज धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। बदले में पा रहे हैं प्रदूषित वातावरण, अस्वस्थता और कंक्रीट का जंगल।
किसान के लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उसकी मेहनत, पहचान और आने वाली पीढ़ियों का सहारा है। आज थोड़े से लालच में उपजाऊ खेत बेचकर कॉलोनियां बसाई जा रही हैं। यदि यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाली पीढ़ियां शुद्ध हवा, अन्न, सब्जियों और पानी के लिए तरसेंगी।
खेतिहर जमीन न बचाने की भूल, यह कड़वी सच्चाई है कि विनाश की बड़ी त्रासदी होगी। सरकार और समाज को भी उपजाऊ भूमि बचाने के लिए गंभीरता से विचार करना चाहिए।
पुष्पा भाटी
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