देव शयनी एकादशी — उर्मिला पाण्डेय उर्मि मैनपुरी उत्तर प्रदेश।

यह बात अजीब-सी लगती है कि देव शयनी एकादशी देवता सोते हैं हां देव सोते हैं भगवान विष्णु देव शयनी एकादशी को क्षीरसागर में शयन करते हैं सारा कार्य भार भगवान शंकर जी भोलेनाथ के ऊपर दे जाते हैं। भगवान शंकर आज देव शयनी एकादशी से लेकर देव उत्थानी एकादशी तक सृष्टि का कार्य भार संभालते हैं।
इसी कारण श्रावण, भादों, आश्विन और कार्तिक माह में शिवजी की पूजा होती है।सोलह सोमवार का वृत इसी श्रावण मास से उठाया जाता है और कार्तिक माह के अंतिम सोमवार को सोलह सोमवार वृत पूर्ण होते हैं। शिवजी पर बेलपत्र शुद्ध चावल जो खंडित न हों चढ़ाएं गिन गिन कर चावल बेलपत्र चढ़ाने का दूध दही घी चढ़ाने का विशेष महत्व है वेला के फूल आक के फूल धतूरा शमीपत्र कनेर गुड़हल बेलुआ चढ़ाने से शिवजी प्रसन्न होते हैं ऐसा कहा जाता है सभी देवी देवताओं में शिवजी बहुत ही भोले भाले बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं। इनको महादेव भी कहते हैं सबसे बड़े देवता हैं इनकी पूजा स्वयं नारायण बृह्मा इंद्र देव आदि सभी देवता करते हैं शिवजी सबसे ऊपर निराकार सत्ता हैं ब्रह्मा विष्णु शंकर इन्हीं का रूप हैं आज से अर्थात देवशयनी एकादशी से शिव की पूजा आरंभ हो जाती है।इनका न आदि है और न अंत है यह सभी देवताओं के परम हैं।इनकी पूजा करने से सुख शांति एवं मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं।
देव शयन एकादशी, करते हरि विश्राम।
जग का सभी कार्य ही, शंकर करते काम।।
जय भोलेनाथ जय नारायण।जय हो हरिहर भगवान की जय हो।
उर्मिला पाण्डेय उर्मि मैनपुरी उत्तर प्रदेश।




