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महर्षि अरविन्द का दर्शन -डो.दक्षा जोशी ‘निर्झरा’ अहमदाबाद, गुजरात।

 

महर्षि अरविन्द का ‘पूर्णयोग’ संसार से पलायन का नहीं, बल्कि पृथ्वी के दिव्यीकरण का दर्शन है। पारंपरिक वेदांत के विपरीत, वे जगत को मिथ्या नहीं बल्कि चेतना का ही घनीभूत रूप मानते हैं। उनके अनुसार, विकासक्रम केवल जैविक नहीं बल्कि चेतना का है, जहाँ मनुष्य अंतिम पड़ाव नहीं बल्कि एक सेतु है। ‘अतिमानस'( सुपर माइंड) एक ऐसी एकात्मक परम-शक्ति है, जिसके अवतरण से न केवल मानव सोच बल्कि भौतिक शरीर और संपूर्ण पृथ्वी का रूपांतरण होगा। आज का वैश्विक संकट चेतना का संकट है। इसका एकमात्र समाधान मनुष्य द्वारा मानसिक सीमाओं को लांघकर अतिमानसिक चेतना की ओर अगली क्रांतिकारी छलांग लगाना है।

-डो.दक्षा जोशी ‘निर्झरा’
अहमदाबाद, गुजरात।

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