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ऐसा भी होता है – राजेन्द्र परिहार”सैनिक “
बचपन के मासूमियत वाले दौर में कई मजेदार किस्से आते हैं, कुछ विस्मृतियों में लुप्त हो जाते हैं, लेकिन…
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माँ धरा की पुकार: हर आँगन में महके जीवन – हसमुख बी. पटेल, ‘हर्ष’-’परख’ नारदीपुर – अहमदाबाद
प्रकृति केवल जल, जंगल और जमीन का मेल नहीं है, यह हमारी चेतना है, हमारी संस्कृति है और सबसे…
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पश्चिमी मानसिकता” – विनोद कुमार शर्मा
हमारे देश ने सदियों अंग्रेजों की गुलामी सही आजाद हुए तो स्वतंत्र लेकिन गरीबी से लड़ना सीखा लाल गेहूँ जो…
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चुभन का संबंध – कविता साव पश्चिम बंगाल
घर केवल ईंटों और दीवारों से नहीं बनता, वह संबंधों, अनुशासन और त्याग से बनता है। जिस प्रकार बिखरे हुए…
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ईर्ष्या– शिखा खुराना नई दिल्ली
स्नेहा और हरलीन बचपन की सहेलियां थीं। दोनों ने स्कूल पास करने के बाद एक ही कालेज में एडमिशन लिया…
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ऋषि-कन्या और राजा :- दुष्यंत-शकुंतला की अनोखी प्रेम-कथा – नरसा राम जांगु डीडवाना_कुचामन
जहाँ पहली नज़र में ही दिल धड़क उठे, वो प्रेम था इनका। न महल था, न दास-दासी, फिर भी…
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विषय संघर्ष की राह – रमेश शर्मा
आज की कहानी एक ऐसे शख्स की है जिन्होंने बचपन में ही अपने पिता को खो दिया। मां अपने…
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राष्ट्र निर्माण की पहली शर्त: भ्रष्टाचार का समूल नाश – प्रीति शाह पटेल, “प्रीतार्ष” नारदीपुर – अहमदाबाद
किसी भी राष्ट्र की प्रगति केवल उसकी गगनचुंबी इमारतों या आर्थिक आँकड़ों से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र…
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क्या आप भी गर्व कर सकते हैं:एक प्रश्न – सीमा शुक्ला चांद
जब पिता कमाता है मां घर सम्हालती है तब उनकी संतान राजकुमार और राजकुमारी मां कहलाती हैं। फिर चाहे वो…
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संस्मरण लेख : वो भी क्या दिन थे-बिजली गुल और छत पर मेला – श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर-गुजरात)
जब गर्मियों की रातों में बिजली का चला जाना किसी मुसीबत से काम नहीं होता। पर जैसे ही रातों…
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