राष्ट्र निर्माण की पहली शर्त: भ्रष्टाचार का समूल नाश – प्रीति शाह पटेल, “प्रीतार्ष” नारदीपुर – अहमदाबाद

किसी भी राष्ट्र की प्रगति केवल उसकी गगनचुंबी इमारतों या आर्थिक आँकड़ों से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के चरित्र और शासन की पारदर्शिता से मापी जाती है। आज भारत वैश्विक पटल पर एक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन इस मार्ग में ‘भ्रष्टाचार’ रूपी दीमक हमारी नींव को खोखला कर रहा है। यह न केवल देश के विकास को रोकता है, बल्कि एक आम नागरिक के अधिकारों और उसके आत्मसम्मान पर भी गहरी चोट करता है। अब समय आ गया है कि भारत सरकार और हर भारतवासी मिलकर इस सामाजिक बुराई के खिलाफ एक मजबूत और निर्णायक कदम उठाएं।
भारत सरकार से नम्र और मजबूत अपील:
सरकार राष्ट्र की मार्गदर्शक और रक्षक होती है। नीति-विधाताओं से यह पुरजोर अपील है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनों को और अधिक सख्त, पारदर्शी और त्वरित बनाया जाए। तकनीक और डिजिटल गवर्नेंस को इस तरह लागू किया जाए कि आम जनता और सरकारी तंत्र के बीच बिचौलियों की गुंजाइश ही न बचे। रिश्वत लेने और देने वाले, दोनों के लिए न्याय व्यवस्था इतनी कठोर और त्वरित होनी चाहिए कि कोई भी पद पर बैठा व्यक्ति देश की संपत्ति को लूटने से पहले हजार बार काँपे। ईमानदारी को पुरस्कृत और बेइमानी को तुरंत दंडित करना ही सुशासन की पहचान है।
हर भारतवासी से सजग आह्वान:
सरकार चाहे जितने नियम बना ले, जब तक हम स्वयं को नहीं बदलेंगे, यह जंग अधूरी रहेगी। हर नागरिक से यह नम्र अपील है कि वे अपनी नैतिक जिम्मेदारी को समझें। अपने छोटे-छोटे कामों को जल्दी करवाने के लिए रिश्वत देने की आदत को आज ही त्यागें। जब हम गलत का साथ देना बंद कर देंगे, तो गलत करने वालों के हौसले अपने आप पस्त हो जाएंगे। हमें अपने बच्चों को बचपन से ही ईमानदारी और स्वाभिमान के संस्कार देने होंगे।
निष्कर्ष:
भ्रष्टाचार मिटाना किसी एक व्यक्ति या संस्था का काम नहीं है, यह एक सामूहिक महायज्ञ है। जब सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और नागरिकों का अटूट संकल्प एक साथ मिलेंगे, तभी एक स्वच्छ, समृद्ध और सशक्त भारत का उदय होगा। आइए, हम सब मिलकर प्रतिज्ञा करें कि न रिश्वत देंगे, न रिश्वत सहेंगे और देश को इस कलंक से मुक्त कराएंगे।
प्रीति शाह पटेल, “प्रीतार्ष”
नारदीपुर – अहमदाबाद




