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चुभन का संबंध – कविता साव पश्चिम बंगाल

घर केवल ईंटों और दीवारों से नहीं बनता, वह संबंधों, अनुशासन और त्याग से बनता है। जिस प्रकार बिखरे हुए कागज़ अपनी-अपनी दिशा में पड़े रहते हैं, उसी प्रकार बिना मर्यादा और समझ के परिवार भी धीरे-धीरे बिखरने लगते हैं। वहाँ हर व्यक्ति अपनी इच्छा का मालिक बन जाता है, परंतु उस स्वतंत्रता में अपनापन खो जाता है।
दूसरी ओर, जब वही कागज़ एक छोटी-सी पिन से जुड़े होते हैं, तो वे व्यवस्थित दिखाई देते हैं। वह पिन उन्हें बांधती भी है और थोड़ी चुभन भी देती है। ठीक यही स्थिति परिवार के मुखिया की होती है। माता-पिता, बड़े बुज़ुर्ग या घर के जिम्मेदार लोग कई बार रोकते-टोकते हैं, अनुशासन सिखाते हैं, कुछ बातों पर कठोर भी हो जाते हैं। उस समय उनकी बातें हमें चुभती हैं, बंधन जैसी लगती हैं, परंतु वही अनुशासन परिवार को टूटने से बचाता है।
जीवन में हर वह व्यक्ति, जो हमें सही राह दिखाने के लिए टोकता है, वास्तव में हमें जोड़े रखने का प्रयास करता है। यदि केवल मनमानी ही जीवन का नियम बन जाए, तो संबंधों की डोर कमजोर पड़ जाती है। इसलिए हर रोक-टोक को दुश्मनी नहीं समझना चाहिए। कई बार प्रेम का सबसे सच्चा रूप वही होता है, जो हमें गलत रास्ते से बचाने के लिए कठोर बनता है।
हमें उन लोगों का सम्मान करना चाहिए, जो परिवार और संबंधों को सहेजने के लिए स्वयं चुभन सहते हैं। क्योंकि जो जोड़ता है, वही सबसे अधिक चुभता भी है, पर वही संबंधों को टूटने से बचाता भी है।
कविता साव
पश्चिम बंगाल

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