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पश्चिमी मानसिकता” – विनोद कुमार शर्मा

हमारे देश ने सदियों अंग्रेजों की गुलामी सही आजाद हुए तो स्वतंत्र लेकिन गरीबी से लड़ना सीखा लाल गेहूँ जो बड़े देशों में फेंक दिया जाता या जानवरों को खिलाया जाता दाम और अहसान जता कर दिया जाता आत्मनिर्भरता की सोच विकसित कर हमने लगातार मेहनत की हालांकि परिणाम उतने अच्छे नहीं रहे जितने होने चाहिए थे फिर भी आगे कदम बढ़ाए।
आज भी पश्चिमी देश हमारी उन्नति पचा नहीं पाये कभी तेल कहाँ से खरीदो कभी परमाणु सुरक्षा के नाम पर लगातार दवाब बनाया गया कभी सातवें बेड़े का डर दरकिनार कर इंदिरा गांधी जी और अटलविहारी बाजपेयी जी ने परमाणु कार्यक्रम को नई दिशा दी जिससे उन देशों में अजीब सी बेचैनी हुई जो परमाणु शक्ति होने पर एकाधिकार समझते थे तभी से पश्चिम फ्रेस्टेट है।
हाल ही में नार्वे की प्रेस में देश के अपमान भरा पोस्टर और लेख इसका जीता जागता सबूत है तब जब इंडियन एयर फोर्स के पायलट ग्रेट ब्रिटेन के पायलटों को युद्ध कौशल सिखा रहे व्यापार के लिए चौथे पायदान पर रहने के कारण हमारे साथ सारा विश्व व्यापार के लिए उत्सुक है
कुछ पूर्व राजनायिकों की गलती के कारण वीटो पॉवर पड़ोसी चीन के पास चला गया लेकिन भारत की उन्नति में मित्र राष्ट्र रूस की गहरी मित्रता का अहम योगदान भुलाया नहीं जा सकता।
रुपये को गिराने का षडयंत्र लगातार दवाब बनाए जाने का अंतरराष्ट्रीय हथियार बन चुका सबसे अधिक हथियारों की खरीद करने वाला देश जब हथियार बेचने लगे तो इनके पेट में दर्द स्वाभाविक है
सब कुछ होते हुए हम अभी भी जैसे को तैसा इजरायल जैसा जवाब देने में पता नहीं कब तक सक्षम हो पाएंगे कब तक दबाव सहते रहेंगे यह सोचने का विषय तो है ही।
विनोद कुमार शर्मा

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