मलमास – उर्मिला पाण्डेय

मलमास अर्थात लोंद का महीना पुरुषोत्तम मास अधिक मास इन नामों से इसे जाना जाता है।एक धरती पर हिरण्यकशिपु नामक राक्षस द्विति और ब्राह्मण कश्यप ऋषि का पुत्र था राक्षस की कोई जाति नहीं होती बुरे कर्मो से राक्षस कहा जाता है किसी भी जाति में हो सकता है हिरण्यकशिपु ने तपस्या करके भगवान बृह्मा जी से यह वरदान मांगा कि मैं न दिन में मरूं न रात में मरूं किसी अस्त्र शस्त्र से न मरूं आपके द्वारा बनाए गये दिनों में एवं आपके द्वारा रचित सृष्टि से ना मरूं ऐसा वरदान मांगकर उसने भगवान के भक्तों को एवं ऋषियों मुनियों और देवताओं को सताने लगा इंद्रासन पर उसके अधिकार कर लिया उसके आतंक से सभी जीव भयभीत रहने लगे।उसको मारने के लिए माता पार्वती ने एक साल में दस दिन काट काट कर एक मलमास अधिकमास बनाया तीन बरस बाद यह अधिक मास पड़ता है इसमें भगवान गौरीशंकर और पुरुषोत्तम राधा कृष्ण की पूजा होती है।जब यह महीना बना इसका कोई नक्षत्र नहीं कोई स्वामी नहीं यह बहुत परेशान हुआ नारद जी के पास गया नारद जी भगवान बिष्णु के पास ले गए उनके चरणों में यह बहुत रोया गिड़गिड़ाने लगा भगवान बिष्णु मलमास को गौलोकवासी भगवान कृष्ण के पास ले गए अधिक मास ने कहा भगवान पुरुषोत्तम मुझे सभी बहुत ही नीच दृष्टि से देखते हैं मैं आत्म हत्या करना चाहता हूं जिसका संसार में मान्यता नहीं सम्मान नहीं उसके लिए तो मरना ही अच्छा है और रोने लगा भगवान पुरुषोत्तम कृष्ण को उस पर दया आ गई उसकी विनती सुनी और कहा कि संसार में तुम्हारा नाम आदर के साथ लिया जावेगा उसे अपना नाम दिया पुरुषोत्तम मास और कहा कि जो कोई भी इस महीने में दान पुण्य गंगा स्नान कथा भागवत कराएंगे उन्हें करोड़ों गुना अधिक पुण्य मिलेगा।इस कारण इस महीने में दान पुण्य अधिक किया जाता है। बोलिए पुरुषोत्तम मास की जय हो
उर्मिला पाण्डेय।




