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“दिल की कलम से” में शब्दों, सुरों और संवेदनाओं ने बांधा समां

जयपुर आइकन्स की रचनात्मक संध्या में कविता, कहानी और संगीत का हुआ सुंदर संगम

 

सुनीता त्रिपाठी अजय की रिपोर्ट

जयपुर, 5 जून 2026। जयपुर की प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘जयपुर आइकन्स’ द्वारा आयोजित मासिक रचनात्मक संध्या ,दिल की कलम से, का आयोजन जयपुर क्लब के बॅम्बू नूक में हर्षोल्लास एवं आत्मीय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कविता, कहानी, संगीत और भावनाओं से सजी इस विशेष संध्या ने साहित्य एवं कला प्रेमियों को एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान किया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि स्वतंत्र फिल्मकार एवं स्टूडियो लीची के संस्थापक ऋषिराज रहे। उनकी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री “गॉड, वल्चर एंड ह्यूमन” को देशभर में सराहना मिल चुकी है। उनकी प्रेरणादायी उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। कार्यक्रम में साहित्य, संगीत और संवेदनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रतिभागियों ने अपनी कविताओं, कहानियों, गीतों और विचारों के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया। इस अवसर पर अशोक शाह, नरेंद्र जैन, प्रदीप सेठी, विनीता सोमानी, आलोक कुमार, सुनीता त्रिपाठी, मीता माथुर, शिखा सेठी, शर्मिला जैन, पूजा शर्मा, श्वेता माथुर, सोनल शर्मा, तनुषा नागरथ, दीपा रामचंदानी, प्रतिमा नैथानी, रेशमा खान एवं सीमा जैन सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।आयोजन के दौरान मीना गुप्ता एवं निधि झांझरिया ने ‘स्टोरीज़ ऑफ़ हॅम्पर्स’ के स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्यवर्धक ड्राई स्नैक्स का परिचय कराया, जबकि पायल बियानी ने ‘जयपुर होम कुकिंग’ के पारंपरिक घरेलू अचारों से सभी का ध्यान आकर्षित किया। वहीं दीप्ति शर्मा द्वारा संचालित ‘इठलाके’ की आकर्षक साड़ियों के संग्रह ने आयोजन में सौंदर्य और शालीनता का विशेष रंग भरा। शब्दों, सुरों और भावनाओं से सजी इस संध्या में उपस्थित सभी साहित्यकारों, कलाकारों एवं अतिथियों ने रचनात्मक संवाद और सांस्कृतिक जुड़ाव की इस पहल की सराहना की। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को अपनी अभिव्यक्ति साझा करने और एक-दूसरे से जुड़ने का सशक्त मंच प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में जयपुर आइकन्स की संस्थापक कल्पना पुरोहित, हेमा शाह, रिया मनोज एवं दीपक सियाग ने सभी प्रतिभागियों, अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्था भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से साहित्य, कला, संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करती रहेगी। दिल की कलम से केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावनाओं, अभिव्यक्ति और रचनात्मकता का उत्सव बनकर उभरा, जिसने हर सहभागी के हृदय पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।

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