साहित्य संगम मंच की मासिक काव्य गोष्ठी में बही साहित्य और संवेदनाओं की सरिता
मुख्य अतिथि रमा त्यागी ‘एकाकी’ की गरिमामयी उपस्थिति में कवियों ने गीत, ग़ज़ल, कविता और मुक्तकों से सजाई यादगार साहित्यिक संध्या

साहित्य संगम मंच पर आज 9 जून को जून माह की मासिक काव्य गोष्ठी का भव्य एवं गरिमामयी आयोजन संपन्न हुआ। गोष्ठी की अध्यक्षता शिखा खुराना जी द्वारा की गई तथा संचालन आदरणीया सुनीला नारंग “बहुरंगी” जी ने अत्यंत कुशलता एवं आत्मीयता के साथ किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संजीव कुमार जी द्वारा आदरणीया सुनीला नारंग जी रचित माँ सरस्वती के दोहों के वाचन से हुआ।
इसके उपरांत मुख्य अतिथि के रूप में संवेदनशील भावभूमि की सशक्त कवयित्री, गीतकार एवं लेखिका आदरणीया रमा त्यागी “एकाकी” जी का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
21 मार्च 1961 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के राजा का ताजपुर में जन्मी आदरणीया रमा जी ने शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकाल तक अपनी सेवाएँ प्रदान करते हुए सेवानिवृत्त शिक्षिका के रूप में समाज को आलोकित किया। साहित्य के विविध आयामों—गीत, ग़ज़ल, कविता, दोहे, मुक्तक, लघुकथा एवं समीक्षा लेखन—में उनकी सशक्त लेखनी निरंतर सक्रिय है।
उनके प्रकाशित काव्य संग्रह “अभिव्यक्ति के पंख”, “अभिव्यक्ति की उड़ान”, “हे सखि!”, “प्रेम गली अति सांकरी” एवं “एक उदास दिन का गीत” साहित्य जगत में विशेष सराहना प्राप्त कर चुके हैं। देशभर के अनेक साहित्यिक आयोजनों एवं कवि सम्मेलनों में आपकी गरिमामयी उपस्थिति साहित्य प्रेमियों को निरंतर समृद्ध करती रही है। दीपशिखा सारस्वत सम्मान, राष्ट्र विभूति सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत रमा जी का यह प्रेरणादायी कथन सभी के हृदय को स्पर्श कर गया—
“पाठकों और श्रोताओं के हृदय को छू लेने से बड़ा कोई सम्मान नहीं होता।”
गोष्ठी में सभी प्रतिभागियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से साहित्यिक वातावरण को भावमय बना दिया। प्रस्तुत रचनाओं की झलक इस प्रकार रही
मनोरमा जी, दिल्ली ने स्त्री मन की गहन संवेदनाओं को स्वर देते हुए प्रस्तुत किया
“स्त्री के सुंदर आकर्षक काया कोठर में एक मन है
और उस में दबी है कुछ डरी हुई कामनाएँ।”
संजीव कुमार पथिक ने शिखा खुराना जी की प्रेरणादायी रचना “अडिग विश्वास” को अपने मधुर एवं प्रभावशाली कंठ से प्रस्तुत कर उपस्थित सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया—
“धूप मिली तो तप कर निखरी, छाँव मिली मुस्काई हूँ,आँधियों ने राह रोकी तो और दृढ़ हो पाई हूँ।” और कृष्ण भक्ति से ओतप्रोत अपनी रचना की मधुर प्रस्तुत दी—
“ओ मोहन प्यारे, ओ मुरली वाले
तुमरे जैसा कलियुग में कोई नहीं।”
राजेश कुमार ‘राज’ जी ने आशा और नवजीवन का संदेश देते हुए कहा—
“मैं फिर लौटूॅंगा लेकर एक नई पहचान,
मेरे हाथ में होगी नवजीवन की कमान।”
आशा दिनकर ‘आस’, नई दिल्ली ने अपनी ग़ज़ल के माध्यम से भावपूर्ण प्रस्तुति दी—
“जवां थी महफ़िल पर नजर उन्हीं पर,
गुनगुनाई थी गज़ल पर असर उन्हीं पर।”
हनी शर्मा जी ने बदलते जीवन भावों को शब्द दिए—
“कल तक जो सपने थे,
कुछ आज अपने से होने लगे हैं।”
गणपत सिंह भदौरिया जी ने रिश्तों की आत्मीयता को स्वर प्रदान किया—
“राह में क्या मिले, हम सफर हो गए,
दिल के सूने मकां, फिर से घर हो गए।”
प्रभात झा जी ने जीवन के संघर्ष और मुस्कुराहट की संवेदना व्यक्त की—
“हर किसी को मुस्कुराहट का सफ़र अच्छा लगा,
दर्द की राहों में चलना किसे भला अच्छा लगा।”
वीना टंडन जी ने मित्रता की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा
“सर्वश्रेष्ठ मित्र सर्वश्रेष्ठ संबल, जीवन पथ का उजियारा है।
सुख दुःख की हर कठिन डगर में वो विश्वास हमारा है।”
शिखा खुराना जी ने प्रेम और अपनत्व की सुंदर अभिव्यक्ति प्रस्तुत की—
“ईंटों से दीवारें, दीवारों से मकाँ बनते हैं,
मोहब्बत के बिना कहां आशियाँ बनते हैं।”
सुनीला नारंग “बहुरंगी” जी ने भावपूर्ण प्रार्थना स्वरूप कहा—
“हे विधाता! सब कुछ दे सकते हो आप,
हो सके तो दे दो मुझको दुख संताप।”
विशेष रूप से राधा गोयल जी ने कर्ण के जन्म पर कुंती के मन की व्यथा को अत्यंत मर्मस्पर्शी शब्दों में अपनी काव्य रचना के माध्यम से प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया।
कवच और कुंडलधारी जन्मा था दिव्य पुत्र मैंने
अपने ही हाथों उस सुत को, गंगा में बहा दिया मैंने
गोष्ठी के अंत में मुख्य अतिथि आदरणीया रमा त्यागी “एकाकी” जी ने स्त्री विमर्श पर आधारित अपनी भावभीनी एवं प्रभावशाली रचना प्रस्तुत कर समस्त श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बर्फ की थी वे शिलायें
शब्द जो तुमने कहे थे !
जम गए हैं धमनियों में
दर्द जो हमने सहे थे !
आज कोई आँच दे दो
बर्फ की इन सिल्लियों को।
लहू कुछ तो पिघल जाये ,
काश!फिर इन धमनियों में संपूर्ण गोष्ठी आत्मीयता, साहित्यिक ऊष्मा एवं रचनात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रही। साहित्य संगम मंच परिवार सभी प्रतिभागियों एवं उपस्थित साहित्य प्रेमियों का हृदय से आभार व्यक्त करता है।




