क्या कहूं – लड़की बनाम नारी – डॉ सरिता चौहान (प्रवक्ता हिंदी)

क्या कहूं कि कितनी सताई जाती हैं लड़कियां।
पिता के घर में ,पति के गृह में।
पिता के घर में तरासी जाती हैं लड़कियां।
पति के गृह में सजाई जाती हैं लड़कियां।
क्या कहूं कितनी सताई जाती हैं लड़कियां।
इस आधुनिकता के दौर में
इंटरनेट के जमाने में
सोशल मीडिया फेसबुक व्हाट्सएप और ट्विटर पर सताई जाती है लड़कियां।
न जाने कितने मीम्स बनाए जाते हैं और कितनी मीम्स का शिकार होतीं हैं लड़कियां।
क्या सतायी जाने के लिए ही बनाई गई हैं लड़कियां।
अरे! बिना दहेज के ब्याह कर भी नहीं ले जाते हैं ।
घर कहीं मौका मिले तो खुद खाता करके,
चरित्रहीनता की परिभाषा समझाते हैं।
रात को निकलना मनहाई है,
क्योंकि सड़कों-गलियों में तंगहाई है।
चोरी डकैती छिनैती कुछ भी हो सकता है।
यही नहीं, इज्जत आबरू का भी बंटाधार हो सकता है।
स्वतंत्र नारी पहचान हमारी।
जरा पूछो तो नारी कितनी बेचारी।
फिर भी घर की चौखट से,
आसमान की बुलंदियों को छूती हैं लड़कियां।
फिर भी सताई जाती हैं लड़कियां ।
अरे! जरा खुद को संभाल कर तो देखिए।
हर नारी में मां ,पत्नी ,बहू के अलग-अलग रूप नजर आएंगे।
हर लड़की बेटी और बहन नजर आएगी।
एक नारी सदा ब्रह्मचारी,
उस दिन नहीं होगी कोई नारी बेचारी।
अपनी पत्नी में अपना ध्यान लगाइए
परायी को बेटी बहन मां और बहू के रूप में देखिए।
समस्याओं का पेड़ मत उगाइए साहब।
इन्हें जड़ से मिटाइए।
समाज से अनाचार दुराचार अपने आप ही मिट जाएगा।
नारी की स्नेह ममता और भावनाओं का सम्मान कीजिए।
उसे शक्तिमान बनाइए।
समस्त नारी और उसके गौरव को समर्पित
लेखिका/कवयित्री –
डॉ सरिता चौहान
(प्रवक्ता हिंदी)
पीएम श्री एडी राजकीय कन्या इंटर कॉलेज गोरखपुर ,उत्तर प्रदेश।




