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दीपक और दर्पण – कविता साव पश्चिम बंगाल
एक नगर में एक प्रसिद्ध दर्पण था। लोग दूर-दूर से उसे देखने आते थे। कहा जाता था कि वह दर्पण…
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भारतीय संस्कृति : अतीत की गौरवशाली परंपरा और वर्तमान की चुनौतियाँ – सुमन दूबे साऊंखोर बड़हलगंज गोरखपुर
भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृतियों में से एक मानी जाती है। यह केवल रीति-रिवाजों, त्योहारों…
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डिजिटल युग में रिश्तों की बदलती तस्वीर – मंजू शर्मा ‘मनस्विनी’
संवाद पात्र:- पति,पत्नी बेटा–अमन और रजत रसोई में बर्तन समेटते हुए… पत्नी:-आज की परिस्थितियों को ध्यान में रखे चिंताग्रस्त होते…
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स्मृति में जीवित लोग – डॉ संजीदा खानम शाहीन
कुछ लोग देह छोड़कर भी नहीं जाते। वे स्मृतियों में इस तरह बस जाते हैं कि हर साँस के…
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पिंजरा सोने का था, पर पंछी प्यासा था: राजा आहिल और रानी नैना की कथा– नरसा राम जांगु डीडवाना_कुचामन
जो नदी को बाँधने निकले थे, वे खुद ही डूब गए — और जो उसे रास्ता दे गए, वे…
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मटके का पानी – रमेश शर्मा
एक समय था लोगों के पास पैसा कम था। लेकिन व्यवहारिकता थी। व्यक्ति थोड़े में सुखी था। धरम करम पर…
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खामोशी की गूंज – डॉ इंदु भार्गव जयपुर
बरसों बाद आज फिर उस पुराने घर का दरवाज़ा खुला था। आँगन वैसा ही था, तुलसी का चौरा भी…
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संस्मरण: मुसीबतों के काले बादल लेखक: राजेश कुमार ‘राज’
बात वर्ष 2023 के जुलाई माह की है। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में मेरा बवासीर का ऑपरेशन हुआ।…
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निजी स्वार्थ के कारण घटते संस्कार – प्रवीणा सिंह राणा “प्रदन्या”
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और संस्कार उसके जीवन की अमूल्य धरोहर हैं। संस्कार ही उसे सही और गलत…
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महर्षि अरविन्द का दर्शन -डो.दक्षा जोशी ‘निर्झरा’ अहमदाबाद, गुजरात।
महर्षि अरविन्द का ‘पूर्णयोग’ संसार से पलायन का नहीं, बल्कि पृथ्वी के दिव्यीकरण का दर्शन है। पारंपरिक वेदांत के…
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