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पुणे में हिंदी साहित्य के लिए डॉ. मंजु गुप्ता का सम्मान, पांच पद्मश्री हस्तियों ने किया सम्मानित

106 पुस्तकों के सामूहिक विमोचन समारोह ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, "माँ की ममता" महाग्रंथ रहा आकर्षण का केंद्र

 

पुणे। साहित्य जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए सीता ट्रस्ट द्वारा आयोजित 106 पुस्तकों के सामूहिक विमोचन समारोह ने विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। नई पेठ स्थित पत्रकार भवन ऑडिटोरियम में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में देशभर के साहित्यकारों, विद्वानों और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण डॉ. शंकर घनश्याम दास अंदानी के संपादन में प्रकाशित महाग्रंथ “माँ की ममता” रहा, जिसमें 140 रचनाकारों की 15,121 कविताएँ संकलित हैं। इस विशाल साहित्यिक कृति में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मंजु गुप्ता की 54 कविताएँ विभिन्न छंदों में प्रकाशित हुई हैं। उन्होंने इस महाग्रंथ की भूमिका एवं समीक्षा लेखन का दायित्व भी निभाया।

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समारोह में डॉ. मंजु गुप्ता विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने माँ की महिमा पर आधारित दोहों से अपने काव्य पाठ का शुभारंभ किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। अपने उद्बोधन में उन्होंने भारतीय मातृ संस्कृति, संस्कारों एवं सनातन मूल्यों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटना होगा। उन्होंने कहा कि माता-पिता के सम्मान और पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करके ही वृद्धाश्रमों की बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मंजु गुप्ता ने अन्य अतिथियों का पारंपरिक मराठा फेटा पहनाकर स्वागत किया तथा आयोजन के सूत्रधार डॉ. शंकर घनश्याम दास अंदानी को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर रिकॉर्ड्स संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सहभागी लेखकों एवं विशिष्ट अतिथियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए। डॉ. मंजु गुप्ता को हिंदी साहित्य में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान प्राप्त प्रतिष्ठित हस्तियों पद्मश्री भीकुराम जी, पद्मश्री पोपटराव पवार, पद्मश्री चात्रराम पवार, पद्मश्री दादासाहेब लाड, पद्मश्री विजय शाह तथा पद्मश्री डॉ. उदय देशपांडे द्वारा शॉल, स्मृति चिन्ह, शील्ड एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि सीता ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस साहित्यिक महोत्सव को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिली। लंदन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तथा इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इस आयोजन को आधिकारिक रूप से विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज किया, जिससे भारतीय साहित्य जगत को एक नई उपलब्धि प्राप्त हुई। इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों और रचनाकारों ने इसे हिंदी साहित्य के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय बताते हुए आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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